
रवीकुमार शिंदे
जामखेड़ | प्रतिनिधि
जामखेड़ तालुका में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत स्वीकृत कुओं के कार्य लंबित होने की पृष्ठभूमि में पंचायत समिति द्वारा लाभार्थी किसानों को मंजूरी रद्द करने के नोटिस जारी किए गए हैं। लेकिन कार्यों में हुई देरी के लिए किसानों को जिम्मेदार ठहराना प्रशासन की विफलताओं पर पर्दा डालने जैसा है, ऐसी तीखी प्रतिक्रिया लाभार्थियों की ओर से सामने आ रही है।
वास्तव में अनेक किसानों ने अपनी जेब से लाखों रुपये खर्च कर कुओं का निर्माण कार्य शुरू किया है। लेकिन कुशल एवं अकुशल मजदूरी का भुगतान समय पर न होना, ऑनलाइन बिल प्रक्रिया में तकनीकी अड़चनें, प्रशासनिक मंजूरी में देरी तथा निधि वितरण में विलंब के कारण कई कार्य अधूरे रह गए हैं।
एक ओर किसान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन द्वारा मंजूरी रद्द करने के नोटिस जारी करना उनके जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। लाभार्थियों का कहना है कि प्रशासन को अपनी कार्यप्रणाली की कमियों को दूर करना चाहिए, न कि किसानों पर कार्रवाई की तलवार लटकानी चाहिए।
किसानों की प्रमुख मांगें
▪️ कुशल एवं अकुशल मजदूरी के सभी लंबित भुगतान तुरंत किए जाएँ।
▪️ कुओं के कार्य पूर्ण करने के लिए पर्याप्त समयवृद्धि दी जाए।
▪️ मंजूरी रद्द करने संबंधी सभी नोटिस तत्काल वापस लिए जाएँ।
▪️ किसानों को किसी प्रकार की आर्थिक हानि नहीं होगी, इसकी प्रशासन द्वारा गारंटी दी जाए।
लाभार्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि किसानों की जायज मांगों की अनदेखी कर कार्रवाई की गई, तो लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा।
“प्रशासन किसानों को दोषी ठहराने के बजाय अपनी कमियों को दूर करे और लंबित भुगतान तत्काल जारी करे। अन्यथा किसानों के आक्रोश का सामना करने के लिए तैयार रहे,” ऐसी भावना लाभार्थियों में व्यक्त की जा रही है।
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